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Sunday, October 11, 2009

ಒಂದು ಕವಿತೆಯ ಸುತ್ತ...

ಜಯನಗರ ೪ನೇ ಬ್ಲಾಕಿನ ಹಳೆಯ ಪುಸ್ತಕ ಮಳಿಗೆಯಲ್ಲಿ ಕೊಂಡ ಒಂದು ರಸಾಯನಶಾಸ್ತ್ರ ಪುಸ್ತಕದ ಕೊನೆಯ ಪುಟದಲ್ಲಿ ಸಿಕ್ಕ ಒಂದು ಹಿಂದಿ ಶಾಯರಿ/ ಕವಿತೆ. ಓದಿ, ಆನಂದಿಸಿ...

न ये chemistry होती, न ये chemistry होती,
न मैं student होता,न ये lab होता,
न ये accident होता, अभी practical में आयी नज़र एक लड़की ,
सुंदर थी नाक उसकी Test Tube जैसी,बातों मैं उसकी Glucose की मिठास थी ,
सांसों में Ester की खुशबु भी साथ थी,आंखों से झलकता था कुछ इस तरंह का प्यार,
बिन पिए ही हो जाता था Alcohol का खुमार,बेचैन सा होता था उसकी Presence का एहसास,
अंधेरे में होता था Radium का आभास,नज़रें मिलीं, Reaction हुआ कुछ इस तरह,
लव का Production हुआ ,लगने लगे उस के घर के चक्कर ,
ऐसे Nucleus के चरों तरफ़ Electron होए जैसे ,उस दिन हमारे Test का Confirmation हुआ,
अब उसके Daddy से हमारा Introduction हुआ,सुन कर हमारी बात वोह ऐसे उचल पड़े,
Ignition Tube में जैसे Sodium भड़क उठे ,वोह बोले होश में आओ पहचानो अपनी औकात,
Iron मिल नहीं सकता कभी Gold के साथ,ये सुन कर टुटा हमारे अरमानों भरा घर ,
और हम चुप रहे daddy की बत्तों का कड़वा घूँट पि कर,अब उस की यादों के सिवा हमारा कम चलता न था,
और लैब में हमारे दिल के सिवा कुछ और जलता न था,जिंदगी हो गयी Unsaturated Hydro carbon की तरह,
और हम फिरते हैं आवारा Hydrogen की तरह.

ಸುಮಾರು ದಿನಗಳಿಂದ ಏನನ್ನು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡದ ಕಾರಣ, ಇದನ್ನು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಿದ್ದೇನೆ.